ज्यद देर तक सेक्स करने के लए क्य करन चहए

सुरेयावेगम ने समक्का कि अब पाला हमारे हाथ रहा। कहा --
आपिर, कुछ तो कहों । माजरा क्या है
आज़ाद- अजी, श्ररत की बात का एतवार फ्या ?
प७६ आज़ाद-कथा
वेगस -वाह, सबको शामिल 'न करो । पर्ची श्रंगुलियाँ बराबर
नहीं होतीं | श्रत्र यह बताइए कि-हमले जो वादे किए थे, ' वे याद हैं ह
था भूल गए
इक़रार जो-किए थे कभी हम से आपने ;
: कहिए बे याद हैं कि फरामोश हो गए ९ -
आजादु-याद हैं। नयाद होना क्या माने ? ' ' '
वेग -आपके वास्ते हुकका भर छाश्ये।॥|. ..'
' श्रन्नाद-धगर कुक््स हो तो अपने खिंदमतगार से हुक्‍्का
मेंगवा छू । अव्वासी, ज़रा उनसे कहो, हुएका भर छावें। ह
अब्यासी ने जाकर चण्ड्बाज से हुशक़ा भरने को कहा । चणंडूबाज
हुक्‍का केकर ऊपरं गए तो घलछारक्स्ी 'को देखते ही बोले--कहिए
झलारक्खी साहय, मिज़ाज तो श्च्छे हैं ? !
सुरेयावेगम धक-से २ह गई। वह्द तो कहिए खैर गुजरी कि अब्यासी
वहाँ पर न थी । चरन्‌ बद्दी किरकिरी होती। चुपके से चण्डूबाज़ को
घुलाकर कहा--थहाँ हमारा वाम सुरेयाब्यम है। ख़ुदा के वास्ते हमें
अलारक्खी न कहना | यह तो बताश्ो, तुम ईनके साथ : कैसे हो लिए ?
तुमसे 'इनसे तो दुशमनी थी ? चलते वक्त कोड़ा मारा था । ।
* अण्डूबोज-हइसऊे बारे में किर भर करूँया। अप
- झाजाद-क्या खुदा की शान है कि खिदमतगार वो अन्दर छुलाया
॥4॒
जाय और मालिक तरसे !
वेगम-क्ष्यों घबराते हो ? जरा बार्दे तो करे छेने दो १ उसे मुए
मसखरे को कहाँ छोड़ा? ”".. * 0० 03228
झाजाद--बह छड़ाईं पर मारा गया । * ' 5 ५०
बेगम-ऐ है, सार डाछा गया ' बड़ा हसोड़ था बेचारा | *
आज़ादनस्था पज्जप
सुगैयावेगम ने अपने हाथों से गिलौरियाँ बनाई भोर अपने ही हाथ
से मिरजा भाजाद को खिलाई | श्राजाद दिल में सोचरदे थे फि या खुदा,
हमने कोना ऐसा छूचाब का काम किया, जिसके बदले सें तू हम
पर इतना मिहर॒वान हो यया है! हालाँकि नल कभी की जान ने पहचान ।
यकीन हो गया कि ज़रूर हमने कोई नेक कास किया होगा। चण्डयाज
को भी हैरत हो रही थी कि अऋलारक्खी ने एतवी दोछत कदाँ पाई। एधर-
उधर सौचस्के हो-होकर देखते थे, सगर सबके सामने कुछ पएछना श्दत
के खिलाफ समभते थे। इतने में साजाद बोठे-ज़माना भी कितने, रस
बदुलूता है ।
सुरैयावेगम -हाँ, यह तो पुराना दम्त्र ऐ। लोग इकरार कुछ वरते है
ओर करते कुछ हैं । ह
भाज़ाद-- यों नहीं कहती, कि लोग चाहते इछ है भोर होता झछ भ्रौर है।
सुरैयावेगम--दो-चार दिन भ्ौर सत्य करो। जहाँ इतने दिनों खामोश
रहे, नव चन्द रोज तक भर चुपके रहो । ह
चण्ड्बाज--छुदावन्द, ये बातें तो हुआ ही फरंगी, अब चलिए कछ
फिर आइएगा। मंगर पढले वीन्रछा. ॥।
सुरेयावेगम--ज़रा समक-दूककर !
चण्ड्बाज--कुछूर हुआ। ,.
ः | भ छ
जआज़ाद-हम समझे ही सदा, क्या कु्टर हुआ १
सुरैयाबेंगम- एक बांत है । यह स्व जानते हैं।.._,“ *
श्राजाद--फिर अन चहूँ! मगर ऐसा न हो कि यह सारा ज्ञोश ढो-
चार.ठिन से «ढा पड जाय। अगर ऐसा 'हुआ तो मै जान दे दूँगा ।
घुरैयावेगस--मैं तो यह खुद ही कहने को थी। तुस सेरी ऊबान ,ले
बात छीन ले गए॥ - [>» -+*'- कटा
जल्द आजाद कथी
हा
भ्राजद--हमारी सुदृब्बत का हाल खुदा हो जानता है।
सुरैयाबेगम-खुदा तो सब जानता है, सगर आपकी सुदृब्बत का'
हार हमसे ज्यादा और फ्ोई नहीं जानता। या (चण्डूबाज की तरफ
इशारा करके) यद्द जानते हैं| याद है न) भगर अब की भी वेसा ही
इकरार है तो खुदा ही मालिक हैं। '
आज़ाद --अव उन बातों का ज़िक्र ही न करो ।
सुरैयाबेगम --.ह में हसख हालत में देखकर तुम्हें ताज्जुब तो जरूर हुआ
होगा कि इस दरजे पर यह कैसे पहुँच गई। वह बूढा याद" है मिसकी
तरफ से आपने खत लिखा था ?
आज़ाद मिर्जा कुछ जानते होने तो समझते, हाँ-हाँ कहते जाते थे।
साखिर इतना कहा-तुम्र भी तो बकील के पाप्त राई थीं? और
हमको पकड़वा छुछाया था ! मगर सच कइना, हम भी किस चालाकी से
सिकल भागे थे !
सुरैयावेगघ--और उसका आपको फख हैं। शरमाश्रो न शरमाने दो ।
आ्राज़ाद- झजी, वह सोका ही और था। -
सुरैयाब्रेगस ने भपना सारा हार कह सुनाया । श्रपना जोगिन
बनना, शहंसवार का आना, थानेदार के घर से भागवा, फिर वकीछ-
साहब के यहाँ आ फैँसना, गरज, सारी बाते कह सुनाई ।
आज़ादु-ओफन्द्रोह, बहुत सुखीबतें उठाई !
'सुरैयाबेगम--अब तो यही जी चाहता हे क्लि शुभ घड़ी निकाह दो
तो सारा ग़म भूल जाय ।
चग्डूबाज़--हम बेगमसाहब को तरफ होंगे। आप ही ने तो को ड़ा
जमाया था !'
आाज़ाद--कोड़ा अभी तक नहीं भूले! एम तो बहुतसी बातें भूल गये ।
६2. थे
श्राज़ाद कधा ज्७ए्‌
सुरैयावेगम--अब तो रात बहुत ज्यादा गई, क्यों न नीचे जाकर
दारोगा साहब के कमरे में सो रही ।
आजाद उठने ही को थे कि अजान की भावाज कान में आई । बातों
में तड़का हो यय्रा । भाज़ाद यहाँ से चले तो रास्ते में सुरयायेगम का
हाछ पूछने लगे--क्योंजी, बेगमध्ाहव एसकों वही झाजाद समझती
हैं । क्या हमारी-उनकी सरत बिछऊुछ मिलती है ?
चण्डवाज़--+जनाव, साप उनसे थीस हैं, उन्गीस नहीं ।
झाजाद--तुमने कहीं कह तो वहीं दिया कि और थाठमी है ।
चग्डूबाज->पराइ-वाह,में कह देता तो जाप व्दाँ घेंसने भी पाते? अव
कहिए तो जाएर जढ़ हूँ । पस्त,ऐसी ही बातों से तो झ्ञाग लग जाती है !
ये बातें करते हुए भाजाद घर पहुँचे भोर गाड़ी से उतरने ही को
थे कि कई कांस्टेबर्लों ने उनको घेर लिया । भाज़ाद ने पेंतरा बदलकर
कद्ठा--ए, तुम छोग कौन हो ?
जमादार ने भागे बदकर वारट दिखाया और कह्दा- धाप मेरे
हिरासत में हैं। चग्ह्याज़ दुषके-दयके याड़ी में बैठे थे। एक सिपाही ने
बनझो सी निकाला । आज़ाद ने गुस्से में श्राफर दो कांस्टेबलों को थप्पड़
मारे, तो उन्र खर्बो ने मिल कर उनकी सुश्के क॒प्त लीं और थाने की तरफ़

  • सेक्स पक्चर सेक्स करते हुए दखइए
  • सेक्स करने वल फल्म सेक्स करने वल
  • सेक्स करते हुए वडय सेक्स करते हुए
  • सेक्स करने वल फल्म सेक्स करने वल
  • सेक्स करने वल नंग पक्चर
  • सेक्स फल्म चलू करें
  • सेक्स फल्म चलू करें
  • सेक्स वडय सेक्स करने वल
  • डग सेक्स करते हुए
  • लंबे समय तक सेक्स करने के उपय
  • सेक्स फल्म दखइए कम करते हुए
  • सेक्स करते हुए वडय सेक्स करते हुए
  • सेक्स करते हुए हंद
  • सेक्स करते हुए हंद
  • खुल सेक्स कैसे करते हैं
    सेक्स करते हुए लड़क लड़क दखएं
    सेक्स मूव चुदई करते हुए
    सेक्स करने क दवई
    सेक्स करते हुए लड़क लड़क दखएं
  • लंबे समय तक सेक्स करने के उपय
  • लंबे समय तक सेक्स करने के उपय
  • सेक्स वडय सेक्स करने वल
  • लड़क क सेक्स कैसे करें
  • लंबे समय तक सेक्स करने के उपय
  • सेक्स करते हुए वडय सेक्स करते हुए
  • सन लयन के सेक्स करते वडय
    लंबे समय तक सेक्स करने के उपय
    ब्लू पक्चर दखएं सेक्स करते हुए
    सन लयन के सेक्स करते वडय
    हंद सेक्स करते हुए दखइए