फिलस्तीन प्रदर्शनकारियों और इजरायली सेना के बीच झड़प, 20 लोगों की मौत

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नई दिल्ली: गाजा-इजरायल बॉर्डर पर हजारों फिलिस्तीनी नागरिकों ने प्रदर्शन किया इजरायली सेना और फिलस्तीन प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में शुक्रवार को 20 लोगों की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों घायल हो गए.

हाल के वर्षो में गाजा सीमा से लगते इलाके में इजरायल के खिलाफ फिलस्तीन नागरिकों का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया था. प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए इजरायली सेना को गोली चलानी पड़ी. घटना के सामने आने के बाद यूएन सिक्युरिटी काउंसिल ने इजरायल से संयम बनाए रखने की अपील की है.

इजरायल-गाजा बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन के लिए फिलिस्तीन की ओर से 5 कैंप्स लगाए गए हैं. इन्हें ‘ग्रेट मार्च ऑफ रिटर्न’ नाम दिया गया है.

इजरायली डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) के मुताबिक, जमीन दिवस के दिन करीब 17 हजार फिलिस्तीनी नागरिक बॉर्डर स्थित पांच स्थानों पर जुटे थे. ज्यादातर लोग अपने कैंप्स में ही थे हालांकि, कुछ युवा इजरायली सेना की चेतावनी के बावजूद सीमा पर ही हंगामा करने लगे. उन्होंने बार्डर पर पेट्रोल बम और पत्थरों से हमला किया. जिसके बाद आईडीएफ ने भीड़ को हटाने के लिए फायरिंग कर दी. विरोध प्रदर्शन 30 मार्च से शुरू हुए हैं.

इस दिन फिलिस्तीन जमीन दिवस मनाता है. कहा जाता है कि इसी दिन 1976 में फिलिस्तीन पर इजरायल के कब्जे के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले 6 नागरिकों को इजरायली सेना ने मार दिया था.

ये विरोध प्रदर्शन 15 मई के आसपास खत्म होंगे. इस दिन को फिलिस्तीन में नकबा (कयामत) के तौर पर मनाया जाता है. 1948 में इसी दिन इजरायल बना था, जिसके चलते हज़ारों फिलिस्तीनियों को अपने घर छोड़ने पड़े थे.

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