कोरोना पर सर्वदलीय बैठक: पीएम मोदी ने कहा- महामारी राजनीति नहीं मानवता का मुद्दा

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नई दिल्ली: कोरोना को अप्रत्याशित बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर सबसे चौकन्ना रहने की अपील की है. नरेंद्र मोदी ने कहा है कि दुनिया के अलग अलग देशों में इस महामारी की ताज़ा स्थिति को देखते हुए हर तैयारी करने की ज़रूरत है. कोरोना पर सरकार की ओर से मंगलवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में पीएम मोदी ने भी अपनी बातें रखी. पीएम ने कहा कि ऐसे में सबको साथ रहकर महामारी से मुकाबला करना चाहिए. 

प्रधानमंत्री ने एक बार फिर कहा कि ऐसी महामारी 100 सालों में एक बार आई है लिहाज़ा इससे निपटने के लिए राजनीति नहीं होनी चाहिए. पीएम ने महामारी को मानवता का मुद्दा बताया है. प्रधानमंत्री ने महामारी की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए वैक्सीनेशन की रफ़्तार बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि सभी राज्यों को उसकी जरूरत के मुताबिक़ वैक्सीन उपलब्ध करवाने की कोशिश की जा रही है. प्रधानमंत्री ने आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि धीरे धीरे वैक्सीन की रफ़्तार बढ़ रही है. 

पीएम ने बताया कि पहला 10 करोड़ वैक्सीन लगाने में 85 दिनों का समय लगा जबकि आख़िरी 10 करोड़ वैक्सीन लगाने में 24 दिनों का ही समय लगा. उन्होंने इस बात पर संतोष ज़ाहिर किया कि दुनिया के किसी भी देश के मुक़ाबले भारत में ज़्यादा लोगों को टीका लग चुका है. हालांकि पीएम ने टीकाकरण अभियान के छह महीने बीत जाने के बाद भी कई स्वास्थ्यकर्मी और फ्रंटलाइन वर्कर को टीका नहीं लगने पर गहरी चिंता भी जताई. नरेंद्र मोदी ने दवाइयों और ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए हो रहे प्रयासों का भी ज़िमर4 किया. 

बैठक में स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने सभी नेताओं के सामने 52 स्लाइड का एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया जिसमें कोरोना शुरू होने से लेकर अबतक सरकार की ओर से उठाए गए क़दमों की पूरी जानकारी दी गई थी. प्रेजेंटेशन में बताया गया कि देश में अब केवल 8 राज्य ऐसे हैं जिनमें कोरोना के 10000 से ज़्यादा मामले हैं. जिनमें सबसे ज़्यादा मामले केरल और महाराष्ट्र में है. ये भी बताया गया कि केवल 5 राज्य ऐसे हैं जिनमें संक्रमण दर 10 फ़ीसदी से अधिक है. 

हालांकि इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करने की पीएम मोदी की अपील के उलट बैठक पर राजनीति भी हावी रही. कांग्रेस, अकाली दल, आरजेडी, आम आदमी पार्टी और लेफ्ट पार्टियों ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया. आम आदमी पार्टी ने पहले तो बैठक में हिस्सा लेने का ऐलान किया लेकिन जैसे ही अकाली दल ने कृषि क़ानूनों का हवाला देकर बैठक का बहिष्कार करने की घोषणा की तो पार्टी ने यू टर्न लेते हुए इसमें हिस्सा नहीं लेने का ऐलान कर दिया. 

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