गुजरात में माता-पिता को खोने वाले बच्चों को मदद मिलनी शुरू, हर महीने 4-4 हजार रुपए देगी सरकार

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Coronavirus: देश में जानलेवा कोरोना वायरस ने किसी के संतान होने का सुख छीन लिया तो किसी के सिर से माता-पिता दोनों का साया उठ गया. कोरोना के दौर में सबसे बड़ी चिंता ऐसे अनाथ बच्चों की है, जिनका अब इस दुनिया में कोई नहीं है. कई राज्य सरकारें अपने-अपने तरीकों से इन बच्चों की मदद कर रही हैं. इस बीच गुजरात के नवसारी जिले में माता-पिता दोनों को खो देने वाले 42 बच्चों को महीने में सिर्फ 4-4 हजार रुपए की मदद दी जाएगी.

4 हजार रुपए की मासिक मदद मिलनी शुरू

नवसारी जिले में 18 साल से कम उम्र के 42 बच्चे हैं, जिन्होंने कोरोना की वजह से अपने माता-पिता दोनों को खो दिया. मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (एमएमबीएसवाई) के तहत ऐसे बच्चों को 4 हजार रुपए की मासिक मदद मिलनी शुरू हो गई है. वहीं, 313 अन्य आवेदनों की जांच की जा रही है. फिलहाल उन्हें दो हजार रुपए महीना की मदद दी जाएगी.

नवसारी जिला बाल कल्याण समिति और बाल संरक्षण अधिकारी ने अधिकारियों को सोशल मीडिया, सरकारी और निजी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम चलाने को कहा है. इन कार्यक्रमों में विभिन्न गांवों के सरपंचों को एमएमबीएसवाई योजना के बारे में सूचित किया जाएगा.

गुजरात में अनाथ बच्चों को क्या मिलेगा?

बता दें कि गुजरात में अनाथ बच्चों को 18 साल की उम्र तक 4000 रुपए दिए जाएंगे. पढ़ाई जारी रखने पर 6000 रुपए दिए जाएंगे. अनाथ बच्चों को छात्रवृत्ति और सभी सरकारी योजनाओं और शिक्षा लोन में भी प्राथमिकता मिलेगी.

मोदी सरकार से क्या मिलेगा?

  • अनाथ बच्चों को 18 साल की उम्र के बाद मासिक भत्ता मिलेगा.
  • 23 साल के होने पर पीएम केयर्स फंड से 10 लाख रुपये की निधि मिलेगी.
  • इन बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाएगी. हायर एजुकेशन के लिए लोन दिया जाएगा और उसका ब्याज पीएम केयर्स फंड से दिया जाएगा.
  • आयुष्मान भारत योजना के तहत 18 साल तक 5 लाख रुपए तक का हेल्थ इंश्योरेंस दिया जाएगा.
  • दस वर्ष से कम उम्र के बच्चों का नजदीकी केंद्रीय विद्यालय या निजी स्कूल में नामांकन कराया जाएगा.
  • जो बच्चे 11 से 18 साल के बीच के हैं, उन्हें सैनिक स्कूल और नवोदय विद्यालय जैसे आवासीय स्कूल में नामांकित कराया जाएगा.

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