भारत में हर चौथा बच्चा कुपोषण का शिकार, जानें क्या है राज्यों के हालात

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Malnutrition in India: भारत में कुपोषण अब भी एक गंभीर समस्या बनी हुई है. कोविड महामारी ने भी देश में कुपोषण की स्थिति को और चिंताजनक बना दिया है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2020 की रिपोर्ट के अनुसार भारत 27.2 के स्कोर के साथ 107 देशों की लिस्ट में 94वें नंबर पर है, जिसे बेहद गंभीर माना जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन और प्रसिद्ध स्वास्थ्य मैगजीन लांसेट के मुताबिक देश में हर दूसरी महिला खून की कमी की शिकार है.

वहीं देश का हर तीसरा बच्चा अविकसित या छोटे कद का है. इसके अलावा भारत का हर चौथा बच्चा कुपोषण का शिकार है. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार देश में 9.3 लाख से अधिक ‘गंभीर कुपोषित’ बच्चों की पहचान की गई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से कुपोषण के इस गंभीर मुद्दे पर बड़ा ऐलान किया था. उन्होंने कहा कि, गरीब परिवारों को सरकारी योजनाओं के जरिए साल 2024 तक विटामिन, आयरन और अन्य पोषक तत्वों से मिश्रित चावल दिया जाने लगेगा. इसका लक्ष्य देश की एक बड़ी आबादी से पोषण की कमी को दूर करना है.  

देश में 9.3 लाख से अधिक बच्चें गंभीर कुपोषित’

मॉनसून सत्र के दौरान देश में कुपोषित बच्चों को लेकर राज्यसभा में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से अहम जानकारी दी गई. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बताया कि ICSD-RRS पोर्टल (30 नवंबर, 2020 तक) के अनुसार, देश में 6 महीने से 6 साल उम्र के बीच के 9.3 लाख से अधिक ‘गंभीर कुपोषित’ बच्चों की पहचान की गई है. इनमें सबसे खराब स्थिति उत्तर प्रदेश की है जहां 3, 98,359 गंभीर रूप से कुपोषित हैं. इसके बाद बिहार का स्थान है जहां, 2,79,427 बच्चें गंभीर कुपोषण का शिकार हैं. 

बता दें कि, बिहार और उत्तर प्रदेश में बच्चों की जनसंख्या भी देश में सबसे अधिक है. 2011 के जनगणना के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 0-6 साल के 2.97 करोड़ बच्चे हैं जबकि बिहार में ऐसे बच्चों की संख्या 1.85 करोड़ है. 

गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए जारी किए गए 5,312.7 करोड़ रुपये

साथ ही स्मृति ईरानी ने राज्यसभा में जानकारी दी थी, सरकारी योजनाओं के तहत, इन ‘गंभीर कुपोषित’ बच्चों को पोषक आहार उपलब्ध कराया जाता है. मंत्रालय ने इसके लिए 2017-18 से 2020-21 तक देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 5,312.7 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है. इनमें से 31 मार्च तक 2,985.5 करोड़ रुपये का इस्तेमाल किया गया है. 

एक अनुमान के अनुसार देश में 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु के मामले में सबसे ज्यादा 68 फीसदी कुपोषण का शिकार होते हैं. कुपोषण के चलते होने वाली बीमारी, मृत्यु और उत्पादकता में कमी से देश को हर साल 7400 करोड़ रुपये का नुकसान होता है. 

कोविड महामारी ने बनाया कुपोषण की स्थिति को और गंभीर 

एक्स्पर्ट्स का भी मानना है कि, महामारी के इस दौर में देश में मिड-डे मील में रुकावट और आर्थिक तंगी के चलते कुपोषण की स्थिति और गंभीर बन गई है. Centre for Science and Environment की स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट 2021 सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 महामारी के कारण 0 से 14 साल के 37.5 करोड़ भारतीय बच्चों पर लंबे समय तक बुरे असर का साया रहेगा. इन बच्चे को कुपोषण, अशिक्षा और अन्य कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. 

गंभीर कुपोषित बच्चों का राज्यवार आंकड़ा 

गंभीर कुपोषित बच्चों के मामले में महाराष्ट्र तीसरे नंबर पर है जहां 70,665 बच्चें इस का शिकार हैं. इसके बाद गुजरात (45,749) और छत्तीसगढ़ (37,249) का स्थान आता है.  इस लिस्ट में ओडिशा (15,595) छठें, तमिलनाडु  (12,489) सातवें, झारखंड (12,059) आठवें, आंध्र प्रदेश (11,201) नवें और तेलंगाना (9045) दसवें स्थान पर मौजूद है. 

इसके अलावा असम में 7218, कर्नाटक में 6899, केरल में 6188 और राजस्थान में 5732 बच्चें गंभीर कुपोषण का शिकार हैं. 

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