योगी सरकार की सौगात, UP के 17 शहरों को दी फ्री Wifi की सुविधा

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highlights

  • उत्तर प्रदेश में अगले साल होगा विधानसभा चुनाव
  • 17 शहरों की 217 जगहों पर दी जाएगी वाईफाई की सुविधा

नई दिल्ली:

UP Assembly Election : उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath Government) ने बुधवार को प्रदेशवासियों को बड़ी सौगात दी है. योगी सरकार (Yogi Government ) की ओर से फ्री वाई-फाई की ये सुविधा 17 शहरों की 217 जगहों पर दी जाएगी. इसके लिए सरकार ने अधिकारियों को जगहों की पहचान करने के निर्देश दे दिए हैं. इसके साथ ही बड़े शहरों में दो स्थानों पर और छोटे शहरों में एक स्थान पर मुफ्त वाई-फाई की सुविधाएं दी जाएंगी.

यूपी की योगी सरकार लोगों को फ्री वाईफाई सुविधा देने जा रही है. इसके लिए 217 शहरों में सार्वजनिक स्थान चिह्नित हो रहे हैं. सरकार 17 नगर निगम वाले शहरों सहित कुल 217 शहरों में मुफ्त वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध कराएगी. बड़े शहरों में दो स्थानों पर और छोटे शहरों में एक स्थान पर फ्री वाईफाई की सुविधा मिलेगी.

उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, वाराणसी, प्रयागराज, झांसी, बरेली, सहारनपुर, मुरादाबाद, गोरखपुर, अयोध्या, मेरठ, शाहजहांपुर, गाजियाबाद, मथुरा-वृंदावन और फीरोजाबाद नगर निगम वाले शहरों के अलावा 200 नगर पालिका परिषद वाले शहरों में यह सुविधा प्रदान करेगी. फ्री वाईफाई की सुविधा खासकर बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, तहसील, कचहरी, ब्लाक व रजिस्ट्रार कार्यालय के आसपास दी जाएगी. इसके लिए स्थान चिह्नित करने के लिए कहा गया है.

मुख्यमंत्री योगी ने दिए निर्देश- कर्मचारियों की शिकायतों का हो समाधान

आपको बता दें कि इससे पहले यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वेतन विसंगति का मसला हो, पदोन्नति में देरी की टीस हो या फिर दैनिक कामकाज से जुड़ी कोई और परेशानी, सबका समाधान होगा, बिना देरी के करने के निर्देश दिए हैं. हर सप्ताह एक दिन केवल कार्यालय के कर्मचारियों के नाम होगा. हर कार्यालय में उच्चाधिकारी सप्ताह में एक दिन एक घंटा कर्मचारियों की समस्याओं, शिकायतों का संज्ञान लें. उन्होंने इसके लिए तय दिन कार्यालय अवधि के आखिरी एक घंटे को आरक्षित करने को सुविधाजनक बताया है.

पिछले दिनों लोकभवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कर्मचारियों की तमाम ऐसी शिकायतें हैं, जो स्थानीय स्तर पर अधिकारी के थोड़ा संज्ञान लेने से निस्तारित हो सकती हैं. दैनिक कामकाज में अक्सर व्यस्तताओं के चलते इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता, जिससे प्रकरण लंबित रह जाता है. ऐसे में सप्ताह में किसी एक दिन एक घंटे का समय कर्मचारियों की समस्याओं को सुनने के लिए तय किया जाना जरूरी है. उन्होंने कहा कि शिकायतों का निस्तारण समयबद्घ ढंग से किया जाए.



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