राजस्थान कांग्रेस में हलचल जारी, संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर स्थिति अब भी साफ नहीं

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<p style="text-align: justify;"><strong>जयपुर:</strong> कांग्रेस शासित राजस्थान में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और राजस्थान के प्रभारी अजय माकन की तरफ से विधायकों व संगठन पदाधिकारियों के बीच लगातार बैठकों के बावजूद मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है. मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर कोई स्पष्ट संकेत माकन या पार्टी के किसी और वरिष्ठ नेता ने नहीं दिया है.</p>
<p style="text-align: justify;">गहलोत मंत्रिमंडल में फेरबदल व हजारों की संख्या में राजनीतिक नियुक्तियों की सुगबुगाहट के बीच माकन ने यहां कांग्रेस व समर्थक विधायकों से फीडबैक लेने का काम गुरुवार को पूरा किया. इसके बाद उन्होंने पार्टी की प्रदेश कार्य समिति की बैठक भी ली. इस दौरान माकन ने विधायकों व मंत्रियों और सरकार के प्रदर्शन विकास कार्यो का मूल्यांकन के बारे में फीडबैक लेने के साथ-साथ जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रमुखों के नाम मांगे थे. उन्होंने अपने तीन दिवसीय दौरे के अंतिम दिन शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर फीडबैक कार्यक्रम को पूरा किया और अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार की तरफ से किए गए कामों की तारीफ की. हालांकि, उन्होंने मंत्रिमंडल विस्तार कब होगा इस बारे में कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>गहलोत सरकार के ढाई वर्ष पूरे</strong><br />हालांकि, कांग्रेस महासचिव ने कहा था कि कुछ मंत्रियों ने स्वेच्छा से मंत्री पद छोड़ने और पार्टी संगठन के साथ काम करने की इच्छा जताई है. दिसंबर 2018 में सत्ता में आई अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार ने कार्यकाल के ढाई वर्ष पूरे कर लिए हैं. पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के करीबी विधायक इस साल जून महीने से ही राजनीतिक नियुक्तियों, मंत्रिमंडल में फेरबदल जल्द किए जाने की मांग कर रहे हैं और वे पार्टी आलाकमान की तरफ से पिछले साल उनसे किए गए वादों को अभी पूरा नहीं किए जाने पर नाराजगी जता चुके हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">पार्टी सूत्रों के अनुसार, अधिकतर विधायकों ने सरकार के कार्यों के प्रति सकारात्मक फीडबैक दिया है. वहीं मुख्यमंत्री के नेतृत्व में भरोसा जताया है. पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के नजदीक विधायकों ने दावा किया है कि मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर सभी चीजों को अंतिम रूप दे दिया गया है और फेरबदल अगस्त के पहले सप्ताह में होने की उम्मीद है.</p>
<p style="text-align: justify;">वहीं, माकन की ओर से इस संबंध कुछ स्पष्ट नहीं बताया गया है कि मंत्रिमंडल फेरबदल या विस्तार कब होगा? माकन ने इस दौरान कांग्रेस व उसके समर्थक कुल 115 विधायाकों से फीडबैक लिया. सूत्रों ने शनिवार को बताया कि &lsquo;&lsquo; विधायकों ने सरकार के कार्यों के बारे में सकारात्मक फीडबैक और राय दी है. उन्होंने मुख्यमंत्री की कार्यशैली की प्रशंसा की और मुख्यमंत्री निर्विवाद नेता के रूप में उभरे हैं.&rsquo;&rsquo;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>माकन ने सरकार के कार्यशैली की प्रशंसा की</strong>&nbsp;<br />शुक्रवार को माकन ने भी सरकार की कार्यशैली की प्रशंसा की. माकन ने पार्टी के प्रदेश कार्यालय के बाहर संवाददाताओं से कहा था,’जब मैं विधायकों से बात कर रहा था तो हर विधायक ने मुझे बताया कि उसके निर्वाचन क्षेत्र में किस तरह से अभूतपूर्व विकास कार्य हुए हैं. चाहे शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, सड़क हो, अस्पतालों की बात हो … एक के बाद एक विधायक आकर बता रहे थे. सब विधायक संतुष्ट हैं और सब विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं.'</p>
<p style="text-align: justify;">सूत्रों ने कहा कि माकन ने विधायकों के साथ जिन बिंदुओं पर चर्चा की उनमें एक यह भी प्रमुख था कि साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी कैसे सत्ता बरकरार रख सकती है. विधायकों ने पूरा भरोसा जताया कि पार्टी फिर से राज्य में सरकार बनाएगी.</p>
<p style="text-align: justify;">इससे पूर्व जुलाई के अंतिम सप्ताह में मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की संभावना थी लेकिन एआईसीसी के महासचिव अजय माकन और के सी वेणुगोपाल 24 जुलाई की रात को यहां पहुंचे और उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ चर्चा की. एक दिन बाद माकन ने कहा कि मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर कोई विवाद नहीं है और फैसला आलाकमान पर छोड़ दिया गया है. गहलोत सहित राजस्थान मंत्रिमंडल में अभी 21 सदस्य हैं और अधिकतम नौ और लोगों को समायोजित किया जा सकता है. इसी तरह जिला स्तर पर पार्टी इकाइयों में पद रिक्त हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">पिछले साल पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के नेतृत्व में कुछ विधायकों ने मुख्यमंत्री गहलोत के नेतृत्व के प्रति नाराजगी जताते हुए बागी रुख अपना लिया था. हालांकि, बाद में पार्टी आलाकमान के हस्तक्षेप से मामला सुलझ गया था. तब पायलट समर्थकों की शिकायतों पर विचार के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था.</p>
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