शेरशाह के आखिरी सीन को देख भीग रही हैं पलकें, ये है इसके पीछे की बड़ी वजह

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Shershaah Climax: शहीदों की चिताओं पर हर बरस लगेंगे मेले, वतन पर मिटने वालों का बाकी यही निशां होगा……एक ऐसे ही शहीद हैं कैप्टन विक्रम बत्रा (Vikram Batra). जिनकी शहादत आज तक याद की जाती है. मरकर भी अमर हो जाए वही तो शहीद कहलाते हैं और ये मुकाम कैप्टन विक्रम बत्रा के हिस्से भी आया. देश की आन, बान और शान के आगे सब भूल गए. उन्हीं पर बनी है फिल्म है शेरशाह (Shershaah). जिसमें उनकी जिंदगी के कई पहलुओं को दिखाया गया है. उनकी शुरुआती जीवन के बारे में भले ही हम नहीं जानते थे लेकिन उनकी शहादत से कोई भी अंजान नहीं. जब फिल्म शुरू होती है तभी हमें पता होता है कि इसका अंजाम क्या होने वाला है बावजूद इसके शेरशाह का क्लाइमेक्स सीन (Shershaah Climax Scene) हमें भावुक करता, रुलाता है और कचोटता भी है. 

आखिरी सीन को देख भावुक हो रहे हैं लोग 
1999 में हुए करगिल युद्ध में पीक 5140 को कैप्चर करने के बाद चोटी 4875 पर कब्जा करने का जिम्मा कैप्टन विक्रम बत्रा की टीम को ही सौंपा गया था. इस चोटी पर भारत को फतह तो मिली लेकिन लड़ते लड़ते कैप्टन विक्रम बत्रा शहीद हो गए. इसके बाद तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर पालमपुर लाया गया था. जब इस सीन को शेरशाह में दिखाया गया तो इसे देखकर हर कोई रोने लगा. लेकिन आखिर ये सीन इतना उम्दा कैसे फिल्माया गया. इसका कारण था फिल्म में विक्रम बत्रा और उनसे जुड़ा हर एक किरदार. जब शुरुआत से ही किरदारों से प्यार हो जाए तो उनके बिछड़ने की कल्पना नहीं की जा सकती. और यही शेरशाह के साथ हुआ. विक्रम बत्रा के किरदार में सिद्धार्थ मल्होत्रा और डिंपल चीमा के किरदार में कियारा आडवाणी ने ऐसी छाप छोड़ी कि जो अमिट हो गई. लोग हकीकत जानते हुए सच्चाई को बदलने के बारे में सोचने लगे. लेकिन किस्मत को यही मंजूर था और यही दिखाना जरूरी भी था जिसे देखकर दर्शकों के आंसू बह निकले.

खूब पसंद की जा रही है फिल्म
देशभक्ति पर फिल्में तो कई बनी हैं और हर फिल्म की अपनी खासियत है. ऐसी ही खासियत लिए हुए है शेरशाह. जिसके चर्चे फिल्म रिलीज होने के 20 दिन बाद भी खूब हो रहे हैं. 

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