स्कूलों को दोबारा खोलने के लिए क्या बच्चों में वैक्सीनेशन होनी चाहिए जरूरी? जानें सरकार का जवाब

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COVID-19 Vaccination: कोरोना की दूसरी लहर झेलने के बाद देश एक बार फिर से सामान्य दिशा में धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा है. देशभर में स्कूलों को दोबारा खोला जाने लगा है. लेकिन, बच्चों में वैक्सीनेशन नहीं होने के चलते अभी तक इसको लेकर एक चिंता बनी हुई है. लेकिन, नीति आयोग के सदस्य स्वास्थ्य डॉक्टर वी.के. पॉल का कहना है कि दोबारा स्कूलों को खोले जाने के लिए बच्चों में वैक्सीनेशन की शर्तें नहीं रखी गई हैं.

बच्चों का वैक्सीनेशन नहीं है शर्त

वी.के. पॉल ने गुरूवार को स्वास्थ्य मंत्रालय की नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि यह मानदंड दुनिया में कहीं भी स्वीकार्य नहीं है, और न ही कोई वैज्ञानिक निकाय, या महामारी विज्ञान के सबूत है, जो इसे एक शर्त के रूप में सुझाते हों… हालांकि, कर्मचारियों का वैक्सीनेशन वांछनीय है.

18 साल के ऊपर के 58 फीसदी को सिंगल डोज

डॉक्टर वी.के. पॉल ने कहा कि यह स्पष्ट है कि वैक्सीन की दो खुराक पूरी तरह से सुरक्षा देती है. उन्होंने कहा कि देश में अब तक 18 साल से ऊपर के 58 फीसदी लोगों को वैक्सीन की सिंगल डोज दी गई है, जो 100 फीसदी होनी चाहिए. पॉल ने कहा कि किसी को नहीं छोड़ा जाएगा. अब तक करीब 72 करोड़ लोगों को वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है. जो लोग बचे हुए हैं उन्हें वैक्सीन की खुराक लगवानी चाहिए ताकि हर्ड इम्युनिटी डेवलप हो सके.

 और बढ़ानी होगी वैक्सीनेशन की रफ्तार

इधर, स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि हमें त्योहारों से पहले वैक्सीनेशन की रफ्तार और तेज करनी होगी. उन्होंने कहा कि मई के 30 दिनों के मुकाबले सितंबर के पहले सात दिनों में ज्यादा वैक्सीन लगाई गई है. पिछले 24 घंटे के दौरान 86 लाख डोज दी चुकी है. उन्होंने कहा कि त्योहारों से पहले हमें वैक्सीनेशन की रफ्तार को तेज करनी चाहिए.

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