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हमारे देश में सिर्फ सबरीमाला ही नहीं ऐसे कई मंदिर हैं जिनमें महिलाओं के जाने पर मनाही है. बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर फैसला सुनाया था जिसके बाद 1 जनवरी को दो महिलाओं ने सबरीमाला मंदिर में जाकर भगवान अय्यपा के दर्शन किए.

बहरहाल भारत में कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जहां पुरुषों के प्रवेश पर रोक है. लेकिन महिलाएं बिना किसी रोक-टोक के मंदिर परिसर में जा सकती हैं. खास बात तो ये है की इनमें से कुछ मंदिरों में महिलाओं की पूजा भी की जाती है.

केरल का अट्टुकल मंदिर

केरल के अट्टुकल मंदिर में पुरुषों के जाने पर पूरी तरह से रोक है. 2016 में पोंगल के त्योहार के दौरान इस मंदिर में तकरीबन 4.5 करोड़ महिलाओं ने प्रवेश किया जिस कारण से इस मंदिर का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड के रिकॉर्ड में दर्ज हुआ. बता दें कि इस मंदिर में नवरात्रों के दौरान भारी संख्या में भीड़ उमड़ती है.

कन्याकुमारी का मां भगवती मंदिर

तमिलनाडु के कन्याकुमारी में स्थित मां भगवती के मंदिर में भी पुरुषों के जाने पर रोक है. और इस मंदिर में देवी को एक कन्या के रूप में पूजा जाता है. मंदिर में पुरुषों के जाने पर मनाही है लेकिन साधु-संत मंदिर के प्रशासन की अनुमति लेकर प्रवेश कर सकते हैं. ऐसी मान्यता है की मां पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी.

नासिक का त्रिंबकेश्वर मंदिर

महाराष्ट्र के नासिक में स्थित त्रिंबकेश्वर मंदिर, जहां पहले महिलाओं के प्रवेश को लेकर रोक थी लेकिन जब मामला हाई कोर्ट में पहुंचा तो कोर्ट ने महिलाओं के पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन इस फैसले के बाद से मंदिर में पुरुषों के प्रवेश पर रोक लग गई.

असम का कामाख्या मंदिर

असम में कामरूप का कामाख्या मंदिर है. इस मंदिर में महिलाएं केवल माहवारी चक्र के दौरान ही मंदिर के परिसर में प्रवेश में कर सकती हैं. मंदिर में केवल महिला पुजारी या संन्यासी मंदिर की सेवा करती हैं, जहां मां सती के महावारी के कपड़ो को प्रसाद के रूप में भक्तों में बांटा जाता है. ऐसी मान्यता है की भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र के साथ मां सती को काट दिया था. जिसके कारण उनकी कमर उस स्थान पर गिर गई थी, जहां पर मंदिर बनाया गया था. बता दें कि ये दुनिया का पहला मंदिर है जहां पर माहवारी को पवित्र माना जाता है.

पुष्कर में ब्रह्मा जी का मंदिर

भारत में ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर है जो राजस्थान के पुष्कर में हैं. इस मंदिर में शादीशुदा पुरुष पर रोक है. जानकारी के लिए बता दे कि इस मंदिर में विवाहित पुरुषों के प्रवेश पर पाबंदी 14वीं शताब्दी से है. पुराणों में बताया गया है कि एक बार ब्रह्मा जी ने पुष्कर झील के किनारे एक यज्ञ करने की योजना बनाई थी, इस दौरान मां सरस्वती थोडा लेट से पहुंची, जिसके चलते ब्रह्मा जी ने मां गायत्री के साथ यज्ञ संपन्न किया. मां सरस्वती को ब्रह्मा जी की यह बात पसंद नहीं आई तब उन्होनें ब्रह्मा जी के मंदिर को श्राप दिया कि “किसी विवाहित पुरुष को आंतरिक परकोटे में जाने की इजाजत नहीं होगी और अगर फिर भी ऐसा कोई करता है तो उसके वैवाहिक जीवन में एक समस्या उत्पन्न होगी. यही वजह है की मंदिर में विवाहित पुरुष नहीं जाते.

मुजफ्फरपुर में दुर्गा माता का मंदिर

बिहार के मुजफ्फरपुर में दुर्गा माता का मंदिर है, जहां पर पुरुषों के प्रवेश को लेकर पाबंदी है. एक तय समय में यहां पुरुषों को परिसर में प्रवेश करने से मना कर दिया जाता है. सिर्फ महिलाएं ही मंदिर में प्रवेश कर सकती हैं. बता दें कि मंदिर प्रशाशन के कानून पुजारियों को लेकर भी काफी कड़े हैं.

केरल के छक्कूलाथुकावु में मां भगवती का मंदिर

केरल में छक्कूलाथुकावु मंदिर में मां भगवती का मंदिर है जिन्हें मां दुर्गा का अवतार माना जाता है. बता दें कि इस मंदिर में महिलाओं को पूजा जाता है. इस मंदिर के पुजारी दिसंबर के महिने में महिलाओं के लिए 10 दिन का व्रत रखते हैं, और पहले शुक्रवार को महिला श्रद्धालुओं के पैर धोते हैं. इस दौरान पुरुषों का जाने पर रोक है.

संतोषी माता के मंदिर

देशभर में संतोषी माता के मंदिरों में भी पुरुषों के जाने की मनाही है. महिलाएं और कुवांरी कन्याएं संतोषी माता के लिए व्रत रखती हैं. कहा जाता है कि इस व्रत के दौरान महिलाओं को खट्टी चीजें खाने की अनुमति नहीं होती. बता दें कि शुक्रवार को पुरुषों को मंदिर में जाने पर पाबंदी है. हालांकि पुरुष शुक्रवार को व्रत रख सकते है, लेकिन मंदिर नहीं जा सकते.

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