नई दिल्ली: अयोध्या विवाद पर बुधवार से सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई शुरू होने जा रही है. आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट इस विवाद पर लगातार सुनवाई की तारीख तय कर सकता है. इस मुकदमे की पिछली तारीख पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी प्रपत्रों का अनुवाद करने का निर्देश दिया था.

मुकदमे की सुनवाई शुरू होने से पूर्व पक्षकारों ने अपने-अपने वकीलों संग दिल्ली में डेरा डाल दिया है. पक्षकारों का कहना है कि अब सुप्रीम कोर्ट से ही उम्मीद है, इस मामले को और नहीं टाला जाना चाहिए, जल्द से जल्द निर्णय सुनाने की जरूरत है.

आपको बता दें कि इस केस के पिछली बार 1 फरवरी को इस मामले की सुनवाई हुई थी, तब वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस और गीता सहित 20 धार्मिक पुस्तकों से इस्तेमाल किए तथ्यों का अंग्रेजी में ट्रांसलेशन न होने की वजह से सुनवाई टालनी पड़ी थी. सुनवाई के दौरान पिटीशनर्स के वकील ने कहा था कि अयोध्या विवाद लोगों की भावनाओं से जुड़ा है. इस पर चीफ जस्टिस बोले- ऐसी दलीलें मुझे पसंद नहीं, यह सिर्फ भूमि विवाद है.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि सबसे पहले मुख्यल पक्षकारों की दलीलें सुनी जाएंगी, बाद में बाकी पिटीशंस पर सुनवाई होगी. जानकारी दे दें कि अयोध्या मामले में तीन पक्षकार हैं. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, राम लला विराजमान और निर्मोही अखाड़ा. इन तीन मुख्य पक्षकारों के अलावा एक दर्जन अन्य पक्षकार भी हैं. 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में कारसेवकों ने विवादित बाबरी ढांचे को ढहा दिया था.

पक्षकारों ने अयोध्या मामले में स्पष्ट कर दिया है कि अब सुप्रीम कोर्ट से ही आस है, पक्षकारों का कहना है कि सुलह-समझौते की गुंजाइश अब दूर की बात हो गई. सुलह-समझौता भी होगा तो वह भी कोर्ट में ही पेश किया जाएगा. इसलिए हमारी आस तो अब सुप्रीम कोर्ट पर ही टिकी हुई है. पक्षकारों ने यह भी कहा कि अब इस मामले को और टाला नहीं जाना चाहिए, जल्द से जल्द निर्णय आए फैसला किसी के हम में हो हमें मान्य होगा.

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