(bogibeel bridge in assam)

गुवाहाटी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश के सबसे बड़े रेल-रोड ब्रिज बोगीबील (bogibeel bridge in assam) का उद्घाटन किया। उनके साथ असम के सीएम सर्वानंद सोनोवाल भी मौजूद रहे। यह पुल असम के डिब्रूगढ़ में बनाया गया है और ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तर और दक्षिण तट को जोड़ेगा। पुल की लंबाई 4.94 किमी है।

1997 में संयुक्त मोर्चा सरकार के प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने पुल का शिलान्यास किया था, वहीं 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने इसका निर्माण शुरू किया था। पुल के पूरा होने में 5920 करोड़ रुपए की लागत आई। बीते 16 साल में पुल के पूरा होने की कई डेडलाइन चूकीं। इस पुल से पहली मालगाड़ी 3 दिसंबर को गुजरी। बोगीबील पुल को अरुणाचल से सटी चीन सीमा तक विकास परियोजना के तहत बनाया गया है।

इस पुल की मदद से असम और अरुणाचल प्रदेश की दूरी कम हो जाएगी. ये पुल असम के डिब्रूगढ़ में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिण कट को धेमाजी जिले से जोड़ता है.

चीन को भारत का जवाब

वहीं इससे ही सटा अरुणाचल का सिलापत्थर भी है, ऐसे में इस पुल को चीन के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है. अरुणाचल प्रदेश से सटे बॉर्डर पर इस पुल को चीन की चुनौती का जवाब माना जा रहा है. सेना की जरूरतों के लिहाज से ये पुल काफी अहम है. सेना अपने भारी टैंक भी इस पुल पर आसानी से ले जा सकती है. इस पुल का शिलान्यास 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने रखा. वहीं 2002 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा इस पुल का काम शुरू किया गया था और अब अटल जी की जयंती के मौके पर ही पीएम मोदी इस पुल का उद्घाटन करेंगे.

#TopStory: Prime Minister Narendra Modi to inaugurate Bogibeel Bridge in Dibrugarh, Assam today. (File pic) pic.twitter.com/gWt8Q3rLDd

— ANI (@ANI) December 25, 2018

5,900 करोड़ रुपए खर्च

4.94 किलोमीटर लंबे इस ब्रिज को बनाने पर कुल 5,900 करोड़ रुपए खर्च आया। इसके शुरू होने से असम और अरुणाचल के बीच सफर 4 घंटे कम हो जाएगा। इतना ही नहीं दिल्ली से असम के डिब्रूगढ़ तक लगने वाला वक्त भी 3 घंटे कम हो जाएगा।

ब्रिज की कई खासियत

इस डबलडेकर ब्रिज की कई खासियत हैं. इस पुल को बनाने में 4857 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. इस पुल के निचले हिस्से में 2 रेलवे लाइनें बिछाई गई हैं और ऊपर 3 लेन की सड़क बनाई गई है. इसके बनने से पूर्वी असम से अरुणाचल प्रदेश के बीच सफर करने में लगने वाला वक्त घटकर सिर्फ 4 घंटे का रहे जाएगा.

साथ ही दिल्ली में डिब्रूगढ़ जाने में 3 घंटे का वक्त कम हो जाएगा. इस पुल के निर्माण में जो भी चीजें इस्तेमाल की गई हैं वो जंगरोधी हैं और 120 साल तक पूरी तरह सुरक्षित हैं. इस पिल में 42 डबल डी वेल फाउंडेशन के खंभे हैं. इन खंभों की वजह से पुल की मजबूती काफी ज्यादा है और बड़े भूकंप और भायनक बाढ़ को भी ये पुल आसानी से सहन कर सकता है.

विदेश में भी चर्चा

 

भारतीय इंजीनियरों के इस बेहतरीन काम का चर्चा दुनियाभर में हो रहा है। खाड़ी देशों के मशहूर अखबार खलीज टाइम्स ने भी इसका जिक्र किया है।

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