मार्क जुकरबर्ग ने मानी अपनी गलती, कही ये बड़ी बात

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नई दिल्ली: फेसबुक सीईओ मार्क जुकरबर्ग (33) ने गुरुवार को कहा कि यूजर्स की डाटा सीक्रेसी को लेकर मेरी कंपनी ने गलती की है. किसी के पर्सनल डाटा का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे. 5 करोड़ डेटा लीक होने के मामले में फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग ने गलती मानते हुए कहा कि निश्चित तौर पर फेसबुक यूजर्स की जानकारियां लीक हुई हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यूजर्स के डेटा की सुरक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है.

करीब 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स का डाटा चुराकर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में दुरुपयोग के खुलासे के बाद अमेरिका की राजनीति में उठा भूचाल बुधवार को भारत पहुंचा. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया, “2019 का चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस डाटा चोरी की आरोपी रिसर्च फर्म कैंब्रिज एनालिटिका की सेवाएं ले रही है. भारत में 20 करोड़ फेसबुक यूजर्स हैं. चुनाव प्रक्रिया प्रभावित करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं करेंगे. जरूरत पड़ी तो फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग भी तलब होंगे.”

जुकरबर्ग ने यह भी साफ शब्दों में जाहिर किया कि डेटा लीक होना विश्वास में सेंध लगने जैसा है. जुकरबर्ग ने कहा, ‘डेटा लीक कैसे हुआ यह समझने की कोशिश कर रहा हूं.’ ब्रिटिश डेटा विश्लेषण कंपनी, कैम्ब्रिज एनालिटिका पर आरोप है कि उसने पांच करोड़ फेसबुक उपयोगकर्ताओं के निजी डेटा बिना उनकी मंजूरी के चुरा लिए हैं और उसका उपयोग राजनेताओं की मदद के लिए किया गया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रेक्सिट अभियान शामिल हैं.

अपने फेसबुक पोस्ट में जकरबर्ग ने पूरे मामले को एक टाइमलाइन द्वारा समझाया. जकरबर्ग ने लिखा कि 2007 में हमने फेसबुक में कई तरह की चीज़ों को अपडेट किया. इसमें दोस्तों के जन्मदिन, एड्रेस बुक, मैप्स जैसे कई एप्स शामिल थे. इसके लिए हमने फेसबुक यूज़र से कुछ जानकारी ली, जिसमें उनके दोस्त कौन हैं जैसी जानकारी शामिल थी.

2013 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के रिसर्चर एलेक्जेंडर कोगन ने एक पर्सनल क्विज़ एप बनाया. जिसे करीब 3 लाख लोगों ने इंस्टाल किया, इसमें कुछ पर्सनल डेटा का भी उपयोग किया गया. इससे ना सिर्फ उन तीन लाख लोगों का डाटा शेयर हुआ बल्कि उनके कई दोस्तों का भी हुआ.

जकरबर्ग ने लिखा कि 2014 में हमने एप्स और डेटा शेयरिंग के तरीकों को पूरी तरह से बदल दिया, जिसके बाद अगर कोई अन्य एप किसी यूजर का डेटा मांगती है, तो उसे पहले यूजर से पूछना पड़ेगा. लेकिन 2015 में एक अखबार की रिपोर्ट से पता लगा कि कोगन ने ये डाटा कैंब्रिज एनालिटका कंपनी के साथ शेयर किया है. जो कि नियमों के खिलाफ था. जिसके बाद हमने तुरंत ही कोगन की एप्लिकेशन को फेसबुक से बैन कर दिया. हमने कोगन और कैंब्रिज एनालिटका से सभी यूजर्स का डेटा डिलीट करने को कहा और इसका सर्टिफिकेट देने को भी कहा.

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