नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि 18 मार्च से शुरू हो रही हैं. नवरात्रि के पहले दिन की जाती है कलश स्थापना. कलश स्थापना की एक विधि होती है. नवरात्रों में किसी योग्य पंडित को बुलाकर भी स्थापना करवा सकते हैं. आज हम आपको बता रहे हैं नवरात्रि में कलश स्थापना की सही विधि. कलश स्थापना के लिये प्रतिपदा के दिन स्नानादि कर पूजा स्थल को शुद्ध कर लें.

कलश स्थापना के लिये प्रतिपदा के दिन स्नानादि कर पूजा स्थल को शुद्ध कर लें. इसके बाद सबसे पहले लकड़ी के एक आसन पर लाल रंग का वस्त्र बिछायें. वस्त्र पर श्री गणेश जी का स्मरण करते हुए थोड़े चावल रखें. अब मिट्टी की वेदी बनाकर उस पर जौ बोयें, फिर इस पर जल से भरा मिट्टी, सोने या तांबे का कलश विधिवत स्थापित करें.

कलश पर रोली से स्वास्तिक या ऊँ बनायें. कलश के मुख पर रक्षा सूत्र भी बांधना चाहिये साथ ही कलश में सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रखने चाहिये. अब कलश के मुख को ढक्कन से ढक कर इसे चावल से भर देना चाहिये. 

एक नारियल लेकर उस पर चुनरी लपेटें व रक्षासूत्र से बांध दें. इसे कलश के ढक्कन पर रखते हुए सभी देवी-देवताओं का आह्वान करें और अंत में दीप जलाकर कलश की पूजा करें व षोडशोपचार से पूजन के उपरान्त फूल व मिठाइयां चढ़ा कर माता का पूजन ध्यान पूर्वक करें. इस घट पर कुलदेवी की प्रतिमा भी स्थापित की जा सकती है. कलश की पूजा के बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करना चाहिए.

Leave a Reply